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Gaban - Munshi Premchand

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क्या सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह मनुष्य को उसके नैतिक आधार से दूर कर सकती है?

ग़बन मुंशी प्रेमचंद का एक अत्यंत मार्मिक और मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जो मध्यवर्गीय जीवन की उस बेचैनी को उजागर करता है जहाँ दिखावा, आडंबर और सामाजिक तुलना व्यक्ति के निर्णयों पर भारी पड़ते हैं।

रमानाथ — एक साधारण युवक, जो अपनी पत्नी की इच्छाओं और समाज में सम्मान बनाए रखने की लालसा में धीरे-धीरे ऐसे मार्ग पर बढ़ता है जहाँ से लौटना आसान नहीं। एक छोटा-सा समझौता, एक क्षणिक दुर्बलता, और फिर अपराधबोध, भय तथा आत्मसंघर्ष की लंबी यात्रा।

प्रेमचंद इस कथा में केवल एक “ग़बन” की घटना नहीं बताते, बल्कि उस मानसिकता का चित्रण करते हैं जो मनुष्य को भीतर से खोखला कर देती है। स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलता, सामाजिक प्रतिष्ठा का दबाव और नैतिक दुविधा—इन सबका सजीव और संवेदनशील चित्र इस उपन्यास में मिलता है।

आज भी, जब उपभोग और बाहरी चमक का आकर्षण पहले से कहीं अधिक है, ग़बन उतना ही प्रासंगिक प्रतीत होता है।

यह केवल एक कथा नहीं, बल्कि आत्ममंथन का आमंत्रण है।

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Specifications

Format Paperback, GenZ
Author's Name Munshi Premchand
Language Hindi
Publication Year 2026
Page Count 328
ISBN 123456789
Target Age Group 12 and above